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अब JRF करने वालो के लिए खुशखबरी - Govt Raised stipends for JRF

Indian Government New Policy on jrf research fellowship for IITians समय था जब लोग मजबूरी में शोध करते थे। खासकर Humanities में। माना जाता था कि इनको कोई नौकरी नहीं मिली, तो अब शोध कर रहे हैं। यह एक तरह से टाइम पास माना जाता था। science में Research करने वालों के लिए भी समाज यह सोचता था कि ये महोदय डॉक्टर या इंजिनियर नहीं बन पाए तो रिसर्च कर रहे हैं। इसका कारण यही था कि इसमें पैसा नहीं था। jrf research fellowship लेने के बाद भी यही समझा जाता था कि किसी तरह पॉकेट खर्च निकल गया है।


मतलब शोध को एक प्रतिष्ठाजनक काम के रूप में मान्यता नहीं मिल पाई है। अपनी ईशा से रिसर्च में आने वाले छात्र विदेश चले जाते हैं क्योंकि उन्हें भारत में बेहतर पैसे और करियर की गारंटी नहीं मिलती।
तो शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देने का एक ही तरीका है कि रिसर्च में पैसे बढ़ा दिए जाएं, अवसर बढ़ा दिए जाएं। सरकार का इस पर अब ध्यान गया है। देश में उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण योजना बनाई है।





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इसके तहत प्रधानमंत्री फेलोशिप की ओर से IIT के research students को पांच वर्षों के लिए प्रति माह 75,000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। IIT के छात्र अब B.tech करने के बाद ही रिसर्च शुरू करके PHD की डिग्री हासिल कर सकेंगे। अभी वे मास्टर्स करने के बाद ही पीएचडी के लिए रजिस्टर्ड होते हैं और उन्हें 25,000 रुपये महीने की स्कॉलरशिप मिलती है। इस प्रस्ताव में यह भी प्रावधान है कि अगर किसी ने शोध कार्य बीच में छोड़ा तो तब तक हासिल की गई सारी राशि एक ही बार में वापस करनी होगी। इसके लिए बीटेक फाइनल इयर के वे ही छात्र अप्लाई कर सकेंगे, जो पिछले छह सेमेस्टर्स में मिलाकर 25 पर्सेंटाइल में आते होंगे। वे अपने रिसर्च के विषय का जो खाका पेश करेंगे, उस पर IIT का broad of governance करेगा और उसकी मंजूरी मिलने पर ही छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।


75,000 रुपये की राशि किसी भी अच्छी नौकरी के प्रारंभिक वेतन से कम नहीं है। इसलिए आशा की जानी चाहिए कि जो स्टूडेंट science and Technology में Research करना चाहते हैं, वे बाहर जाने से बचेंगे। अगर यहां अच्छी-खासी संख्या में Researchers मिल सकें तो देश में अपनी तकनीक के विकास को बढ़ावा मिलेगा। हां, universities में सरकारी दखल ने शोध को भी प्रभावित किया है। जब सरकार की कृपा से संस्थानों के निदेशक नियुक्त किए जाएंगे तो वे शोध के विषयों का चयन भी अपने आकाओं को प्रसन्न करने के लिए कर सकते हैं।

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